ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति

ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति (Status Of English In Rural Education)

ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति अभी भी शंतोष जनक नहीं है। ख़वास कर बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेज़ी शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है। सन 2005 ई० से पहले तो स्थिति बहुत ही दैनिये थी। सन 2005 ई० के बाद कुछ हद तक इसमें सुधार आया है। लेकिन अब अंग्रेज़ी के बग़ैर शिक्षा अधूरी मानी जाती है। यहाँ पढ़ें शारीरिक शिक्षा का महत्व। 

इस भाषा को जानने वाला दुनियाँ के किसी भी कोने में चला जाए उसको भाषा सम्बंधित किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। यह एक ऐसी भाषा है जो सारी दुनियाँ में बोली और समझी जाती है। देहाती क्षेत्रों में इसकी स्थिति कैसी है इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति

Students of “MASTER MIND PUBLIC SCHOOL PARIHAR”

अंग्रेजी भाषा का महत्व

अंग्रेज़ी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। यह दुनियाँ के सभी देशों में बोली और समझी जाती है। विक्किपीडिया के अनुसार यह एक पश्चिम जर्मेनिक भाषा  है जिसकी उत्पत्ति एंग्लो सेक्सन इंग्लैंड में हुई थी। ऐतिहासिक दृष्टि से, अंग्रेजी भाषा की उत्पत्ति 5वीं शताब्दी की शुरुआत से इंग्लैंड में बसने वाले एंग्लो सेक्सन लोगों द्वारा लायी गयी अनेक बोलियों, जिन्हें अब पुरानी अंग्रेज़ी कहा जाता है, से हुई है।

अंग्रेज़ी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है। आज के इस मॉडर्न ज़माने में अंग्रेज़ी भाषा जानना बहुत ज़रूरी है। वैसे लोग जो अंग्रेज़ी भाषा नहीं जानते उनको बहुत तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

अच्छी अंग्रेज़ी बोलने वालों को लोग इज़्ज़त की नज़र से देखते हैं। अब अच्छी कंपनियों में ज़्यादा तर अंग्रेज़ी भाषा का ही प्रयोग किया जाता है। अच्छी कंपनियों में नौकरी पाने  के लिए अंग्रेज़ी भाषा का ज्ञान होना ज़रूरी है।

बड़े-बड़े शहरों में ज़्यादा तर अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग होता है। अच्छे और अंग्रेज़ी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए माता-पिता का अंग्रेज़ी जानना आवश्यक है। यदि माता-पिता को अंग्रेजी का ज्ञान नहीं हो तो उनके बच्चों का नामांकन अच्छे अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूलों में नहीं हो पता है।

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, चीन आदि जैसे देशों में जाने वालों को यदि अंग्रेज़ी नहीं आती तो उनको वहाँ बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि विदेशों में अच्छे पद पर काम करना हो तो आप को अंग्रेज़ी का ज्ञान होना  ज़रूरी है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि मानव जीवन में अंग्रेज़ी भाषा का बहुत महत्व है।

सन 2005 ई० से पहले की स्थिति 

सन 2005 ई० से पहले ग्रामीण शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति दैनिये थी। इस से पहले सरकारी स्कूलों में छठी कक्षा से अंग्रेज़ी का पाठ्यक्रम शुरू होता था। छठी कक्षा से अंग्रेज़ी की पढ़ाई शुरू करने के बाद दसवीं कक्षा तक जाते जाते थोड़ी बहुत अंग्रेज़ी की जानकारी हो जाती थी। जब बच्चे दसवीं पास कर के उच्च शिक्षा के लिए बहार शहरों में जाते थे तो उनको बहुत परेशानी होती थी।

उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में ग़रीबी अधिक होने की वजह से लोग अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में नहीं पढ़ा पाते थे। न ही ट्यूशन दिलवा पाते थे। जिस कारण बच्चों को अंग्रेज़ी शिक्षा का ज्ञान सही ढंग से नहीं मिल पाता था।

लोगों में उस समय अंग्रेज़ी शिक्षा को ले कर उतनी जागरूकता नहीं आई थी। अंग्रेज़ी पढ़ाने वाले शिक्षकों की बहुत कमी थी। सभी गाँव में अंग्रेज़ी पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं मिल पाते थे।

इस कारण भी सन 2005 ई० से पहले ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति  अच्छी नहीं थी। मैट्रिक पास कर के उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले विद्यार्थियों की अंग्रेज़ी बहुत कमज़ोर होती थी।

उनको अलग से अंग्रेज़ी का ट्यूशन लेना पड़ता था। उनकी अंग्रेज़ी कमज़ोर होने के कारण दूसरे विषयों को समझने में काफ़ी दिक़्क़त का सामना करना पड़ता था। विज्ञान, गणित आदि विषयों का अध्ययन करने में बहुत परेशानी होती थी।

अंग्रेज़ी का ज्ञान कम होने के कारण कॉलेज में, दोस्तों के सामने और कक्षा में भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था। जो विद्यार्थी अंग्रेज़ी का ट्यूशन ले कर अपनी अंग्रेज़ी अच्छी कर लेते थे। उनको अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद अच्छी कंपनियों में अच्छी नौकरी मिल जाती थी।

लेकिन ग़रीब विद्यार्थी जो ट्यूशन नहीं ले पाते थे उनकी अंग्रेज़ी अच्छी नहीं हो पाती थी। उनको अच्छी कंपनियों में अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती थी।

सन 2005 ई० के बाद की स्थिति

सन 2005 ई० के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति  में बहुत सुधार आया है। इसके बाद सरकारी स्कूलों में भी पहली कक्षा से ही अंग्रेजी का पाठ्यक्रम लागु किया गया।

सन 1990 के बाद बड़ी तादाद में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शहरों में कमाने के लिए चले गए। वहाँ जाने वाले अधिकतर पढ़े-लिखे नहीं थे। कुछ पढ़े लिखे भी थे लेकिन उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं किये थे। और जो थोड़ा बहुत पढ़े लिखे थे भी तो उनको अंग्रेज़ी का ज्ञान नहीं था।

पढ़े-लिखे न होने, काम पढ़े-लिखे होने एवं अंग्रेज़ी का ज्ञान न होने के कारण उनलोगों को बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनलोगों की आँखें खुली और लोगों ने शिक्षा और खास कर अंग्रेज़ी शिक्षा के महत्व को समझा।

शहरों से कमा कर जब घर लौटे तो अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना शुरू किया। जब उनके बच्चों ने शिक्षा ग्रहण करना शुरू किया तो उनलोगों ने देखा के ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेज़ी शिक्षा की बहुत कमी है। सरकारी स्कूलों में तो पाँचवीं कक्षा तक अंग्रेजी का नाम व निशान नहीं था। लोग अपने बच्चों की अंग्रेज़ी शिक्षा के लिए चिंतित थे।

लोगों ने इसका समाधान ढूँढना शुरू किया। जो लोग शहरों से कमा कर गए थे उनलोगों ने अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ना शुरू किया। साथ ही साथ ट्यूशन के लिए अच्छे शिक्षकों को तलाश कर अपने बच्चों को ट्युशन दिलवाना शुरू किया। इस से उनलोगों के बच्चों की अंग्रेज़ी अच्छी होने लगी।

लेकिन इस से ग्रामीण कक्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेजी की स्थिति  में कोई खास सुधार नहीं हुआ। हाँ इसको पहला क़दम माना जा सकता है और ये एक अच्छी शुरुआत थी। इनलोगों का देखा- देखी जो लोग गॉंव में ही रहकर खेती करते थे उनके अंदर भी अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने की जिज्ञासा जगी।

गॉंव में रहने वालों ने भी अधिक मेहनत  करना शुरू किया। अधिक मेहनत करने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी होने लगी। इनलोगों  ने भी अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना शुरू किया। पहले तो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना शुरू किया।

जैसे जैसे इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी होने लगी इन्होंने ने भी अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में एवं ट्यूशन पढ़ाना आरम्भ कर दिया। इन कारणों से देहाती क्षेत्रों में अंग्रेज़ी शिक्षा की स्थिति अच्छी होने लगी।

सन 2000 ई० के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में निजी विद्यालयों की स्थापना बहुत तेज़ी से होने लगी। जिस से अधिक से अधिक लोगों ने फ़ायदा उठाना शुरू किया। निजी विद्यालयों में आरम्भ से ही अंग्रेज़ी की शिक्षा दी जाती है। इसलिए अंग्रेज़ी शिक्षा की स्थिति सुधरने लगी।

सं 2005 ई०  बाद सरकारी स्कूलों में भी अंग्रेज़ी की शिक्षा प्रथम वर्ग से ही आरम्भ हो गई। सरकारी स्कूलों, निजी स्कूलों और ट्यूशन पढ़ने वालों ने मिल कर ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति  में बहुत सुधार लाया।

अभी भी पूर्ण रूप से सुधार नहीं हुआ है। लेकिन लोग प्रयास में लगे हुए हैं आशा है निकटतम भविष्य में इसकी स्थिति बहुत अच्छी हो जाएगी।

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