भाषण

भाषण (26 जनवरी के लिए )

भाषण की मदद से विद्यार्थी के अंदर से बोलने की झिझक दूर होती है। विद्यार्थियों को सांस्कृतिक कार्य क्रम में भाषण के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इस क्रिया को निरंतर करते रहने से विद्यार्थी में आत्मविश्वास बढ़ता है। और विद्यार्थी बड़े से बड़े प्रोग्राम में किसी भी स्टेज पर बेझिझक बोलने में सक्षम हो पाता है। यहाँ हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में भाषण उपलब्ध है।  जिसे याद कर या समझ कर विद्यार्थी आसानी से कहीं भी भाषण दे पाएंगे। 

भाषण

भाषण – 1 .

परम पूज्य गुरुजन, अभिभवक गण, शिक्षा प्रेमी महोदय, परम प्रिये भाइयों और बहनों। यह हमारा सौभाग्य है। आज हम सब “मुराद मेमोरियल पब्लिक स्कूल” परसा बाज़ार के प्रांगण में हैं। आज इस मैदान में  26 जनवरी की गाथा सुनने के लिए हज़ारों की संख्या में बड़े हर्ष व उल्लास से एकत्रित हैं। 

हमारा यह प्यारा वतन प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध रहा है। इसकी शोभा, सुंदरता, सभ्यता और संस्कृति इसे दुनियाँ में विशेष बनाता  है। आज भी हमारी सभ्यता और संस्कृति संसार के दूसरे देशों से भिन्न है। जो मानवता की पहचान है। 

दुर्भाग्यवश 1946 से पहले लगभग 200 वर्षों तक हमारा देश हमारा देश अंग्रेज़ों के क़ब्ज़े में रहा। हमारा राष्ट्र, हमारी राष्ट्रीयता, हमारे पूर्वज परतंत्र बन बैठे थे। हमारे पूर्वज बड़े-बड़े हाहाकार, क्रंदन, संघर्ष और विपत्तियाँ सहते रहे। 

लाखों जान की क़ुरबानी के बाद दुष्ट अँगरेज़ को नर्क भेजा गया। लेकिन 200 सालों का बना हुआ संविधान शैतान अँगरेज़ के मनचाही का था। जो हमारी सभ्यता, संस्कृति और भारतीय सामाजिक स्थिति के लिए निराश पूर्ण था। 

देश को भारतीय मूल अनुसार के संविधान की नितांत आवश्यकता थी। देश के महापुरुषों ने ये ज़िम्मेदारी डा० भीम राव आंबेडकर को दी। उन्हों ने बड़ी निष्ठ्ता और अथक अध्यन के बाद एक लिखित संविधान का निर्माण किया। जो देश के हित और भारतीय मूल के लोगों के फ़ायदे का था। 

हमारा  संविधान २६ जनवरी 1950 को लागु हुआ। आज हम उसी संविधान के अनुरूप समानता, स्वतंत्र, विकास शील और शांति पूर्ण जीवन निर्वाह कर रहे हैं। 

हमारी स्वतंत्रता, समानता, एकता रहती दुनियाँ तक क़ायम रहे। शुभ कामना व्यक्त करते अपने दो शब्द यहीं सम्पत करता/करती हूँ। 

जय हिन्द, जय भारत, जय जवान, जय किसान, आज़ाद रहे हिंदुस्तान, मुराद मेमोरियल पब्लिक स्कूल ज़िन्दाबाद। 

भाषण 2.

I am Shaikhu Baba from Parsa. On this holy occasion. I wish to speak my ideas on the importance of girl’s education in Hindi.

हमारा यह भारत देश सभ्यता, सुंदरता, समानता और शांति के लिए जग प्रसिद्ध रहा है। और आज भी यहाँ की सभ्यता मानव जाती के अनुकरणीय है।  इसका मुख्य श्रेय माताओं को जाता है। यहाँ की माताओं ने एक पर एक बालकों और बालिकाओं को जन्म दिया है। हमारे देश का इतिहास इसका साक्षी है। 

विगत दस वर्ष पूर्व हमारे समाज ने लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा और पठन-पाठन को भुला दिया था। परन्तु फिर समाज में एक चेतना आई कि लड़कों की तरह लड़कियों को पढ़ाना उच्च शिक्षा देना अनिवार्य है। लोग अपनी बच्चियों को अधिक से अधिक संख्या में विद्यालय भेजना शुरू किया। 

परन्तु अब भी समाज में दो तरह की कुभावना बाक़ी है। कुछ लोग लड़कियों को नापसंद करते हैं। उनका सोंचना है की लड़कियों को पढ़ाना बेकार है। उन्हें समझना होगा कि अच्छी पढ़ी लिखी लड़की ही अच्छेऔर सभ्य बच्चों को जन्म देती है। बच्चे या बच्चियों का संस्कार माँ से बनता है। 

दूसरे कुछ ऐसे लोग हैं जो ग़रीबी का बहाना बनाते हैं। आज कोई भी गाँव ऐसा नहीं है जहाँ विद्यालय न हो। सरकार ने मुफ्त किताब, पोशाक राशि, मध्यान भोजन, क्षात्रवृति और साईकिल की सुविधा दी है। लोगों को बहाना न बना कर अपनी बच्चियों को शिक्षा दिलाने की आवश्यक्ता है। 

आज की इस विशाल सभा में, मैं अपने बड़े बुज़र्गों से अपील करता/करती हूँ। अपने बच्चियों की दिनी तालीम, आधुनिक तालीम, हिंदी, अंग्रेज़ी, विज्ञान और हिसाब आदि की शिक्षा दिलाने के लिए इस “मुराद मेमोरियल पब्लिक स्कूल” में अवश्य भेजें। 

जय हिन्द, जय भारत, जय जवान, जय किसान, आज़ाद रहे हिंदुस्तान, मुराद मेमोरियल पब्लिक स्कूल ज़िन्दाबाद। 

भाषण 3.

My name is Ghazi Khan from Parsa in this “Murad Memorial Public School” Parsa Bazar.

मैं आज प्यारे वतन भारत के पुनीत ऐतिहासिक दिवस 26 जनवरी के शुभ अवसर पर संविधान की आवश्यकता और अनिवार्यता पर संक्षिप्त विवरण पेश करना चाहत/चाहती हूँ। 

एक छोटे परिवार से लेकर बड़े परिवार तक संस्था, संगठन, व्यापार हर एक क्षेत्र में नियम क़ानून की आवश्यक्ता होती है। जिसके आधार पर परिवार, संस्था, संगठन, समुदाय चलता है। समानता, एकता, शांति, प्रगति बानी रहती है,चलती रहती है। 

हमारे देश में भी आज़ादी पाने के बाद संविधान की नितांत आवश्यक्ता पड़ी। क्योंकि यहाँ भारतीय मूल के अनुरूप संविधान न था। जो कुछ था अंग्रेज़ी सभ्यता और अंग्रेज़ों के सुसंगठन और लाभ के लिए था। 26 जनवरी 1950 को हमारे फ़ायदे और भारतीय मूल का संविधान लागु हुआ। 

छोटे समुदाय से ले कर बड़े समुदाय तक जीवन के हर क्षेत्र में नियम क़ानून की ज़रुरत होती है। अगर ऐसा न हो तो समाज में कहीं भी शांति, सुव्यवस्था और प्रगति न होगी। और फिर समाज सुखी समाज नहीं बन पायेगा। 

हम भाई-बहनों को भी अपने स्कूल के नियम क़ानून का पूरी तरह पालन करना चाहिए। तब ही हम तरक़्क़ी की मंज़िल पर पहुँच सकते हैं। इसी के साथ मैं अपनी बातें यहीं समाप्त करता/करती हूँ। 

जय हिन्द, जय भारत, जय जवान, जय किसान, आज़ाद रहे हिंदुस्तान, मुराद मेमोरियल पब्लिक स्कूल ज़िन्दाबाद। 

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