शिक्षा में खेल का महत्व

शिक्षा में खेल का महत्व Importance Of Game In Education

शिक्षा में खेल का महत्व  क्या है ? खेल कूद जीवन का एक अभिन्न अंग है। खेल के माध्यम से, छात्र अपने विभिन्न महत्वपूर्ण कौशल का विकास कर सकते हैं। अनगिनत खूबियाँ हैं जो छात्र खेल के माध्यम से विकसित कर सकते हैं जैसे कि सोच, रचनात्मकता, टीमवर्क और बहुत सी अच्छी आदतें आदि ।

शिक्षा का उद्देश्य मानव का पूर्ण विकास है। मानव के कई पक्ष हैं और शिक्षा इन सभी पक्षों को विकसित करता है । आदमी के पास शरीर, एक दिमाग और आत्मा है। शिक्षा का लक्ष्य शारीरिक , बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास है। आईए इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं। यहाँ पढ़ें ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा में अंग्रेज़ी की स्थिति

शिक्षा में खेल का महत्व

“मास्टर माईंड पब्लिक स्कूल परिहार” के प्रांगण में खेलती बच्चियाँ 

शिशु और खेल

आईए सब से पहले हम शिशु और उसके जीवन में खेल के महत्व के बारे में चर्चा करते हैं। इंसान की शिक्षा खेल से ही शुरू होती है। इंसान जब शिशु होता है तभी से उसकी शिक्षा शुरू हो जाती है। शिशु में गति की शिक्षा खेल कूद से ही शुरू होती है। बच्चा जब लेटा हुआ होता है और अपने हाथों एवं पैरों को हिलता रहता है तो लोग कहते हैं की बच्चा खेल रहा है।

अर्थात बच्चा रोने के अलावा कोई भी हरकत करता है तो लोग कहते हैं के खेल रहा है। इस खेल-खेल से ही बच्चों की शिक्षा शुरू हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियाँ  मिट्टी के खिलौने, बर्तन आदि बनती हैं। इस खेल से उसे ज्ञान होता है की बर्तन, खिलौने आदि कैसे होते हैं। इस से उनमें कुछ नया करने की भावना उत्त्पन होती है। क्रियात्मक कौशल का विकास होता है।

इसी प्रकार लड़के भी खेलते रहते हैं मिट्टी से गाड़ी और कई तरह के खिलौनों को बनाते रहते हैं।  जिस से उनमें क्रियात्मक शैली का विकास होता रहता है। एक साथ कई बच्चे मिलकर खेलते हैं एक दूसरे की मदद करते हैं। इस प्रकार उनमें कई कौशल का विकास होता रहता है। गिल्ली डंडा से प्रारम्भ कर क्रिकेट खेलना शुरू कर देते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में ग़रीबी के कारण बच्चों को बैट नहीं मिल पाता है तो खुद से अपने लिए बैट बनाते हैं। कहीं से कोई ऐसी लकड़ी जिसको बैट की शकल दी जासके लेकर उसका बैट बनाते हैं और खेलते हैं। खुद से बैट बनाने एवं खेलने के क्रम में बच्चों का बौद्धिक एवं शारीरिक विकास होता है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं की बच्चे शुरू से ही खेल-खेल में अपनी शिक्षा का प्रारम्भ कर अपनी कौशल को विकसित करने लगते हैं।

शिक्षा में खेल का महत्व

खेल का महत्व

इंसान का शरीर बहुत ही क़ीमती है इसकी हिफाज़त करना हमारी ज़िम्मेदारी है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग़ रहता है।शिक्षा के साथ साथ खेल से मनुष्य का सर्वांगीण विकास होता है। खेल से मनुष्य का शरीर स्वस्थ राहत है। मनुष्य चुस्त एवं फुर्तीला रहता है।

नियमित रूप से खेलने वाला हमेशा स्वस्थ, चुस्त और फुर्तीला रहता है। उसके मुख पर प्रसन्ता छाई रहती है और तनाव से मुक्त रहता है। खेल मनुष्य के व्यक्तित्व को विकसित कर उसमें निखार लाता है। खेलते वक़्त इंसान दुनिया की साड़ी चिंताओं को भूल जाता है। खेल मनुष्य को नियमों का पालन करना सिखाता है, अनुशाषित करता है।

इस से लोगों में सीखने-सिखाने, सहयोग करने, आत्म-नियंत्रण और बलिदान देने जैसी क्षमताओं  का विकास होता है। यह अलग-अलग जगह के लोगों को क़रीब लाता है जिस से लोगों की संकीर्ण मानसिकता दूर हो कर व्यापक विचारधारा उत्पन होती है।

खेल मनुष्य के जीवन में उच्च आदर्शों का निर्माण करता है एवं उच्च सिद्धांतों पर क़ायम रहना सिखाता है। मनुष्य के जीवन की सफ़लता के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों शक्तियों का विकास होना आवश्यक है।

निरंतर खेलते रहने से मानव जीवन में इन तीनों शक्तियों का विकास होता रहता है। खेल सभी उम्र के लोगों के लिए आवश्यक है जो लोग निरंतर खेलते हैं वो हमेशा चुस्त दुरुस्त रहते हैं।  उनका मन सभी कामों में लगता है। मतलब वो सभी काम को उत्साह से करते हैं और कामयाब होते हैं।

आज के इस व्यस्त जीवन में बहुत कम लोग खेलने के लिए वक़्त निकाल पाते हैं। जो लोग खेलने में दिलचस्पी नहीं लेते वो हमेशा थके-थके और उदास रहते हैं। वो किसी भी काम को उत्साहपूर्वक नहीं कर पाते।

विद्यार्थी-जीवन में ,शिक्षा में खेल का महत्व 

विद्यार्थी-जीवन में खेल का बहुत बड़ा महत्व है। सभी स्कूलों में खेल के फ़ायदे को देखते हुए खेल को अनिवार्य किया गया है। और उसका फ़ायदा भी नज़र आने लगा है। 1990 ई० से पहले ख़ास कर देहाती क्षेत्रों में खेल को ज़्यादा अहमियत नहीं दी जाती थी।

लेकिन लोग जैसे-जैसे जागरूक होते गए खेल की अहमियत को समझने लगे। और सभी स्कूलों में खेल को अनिवार्य रूप से लागु किया जाने लगा। पहले ज़्यादातर स्कूलों में बच्चों को कबड्डी का खेल खेलाया जाता था। धीरे-धीरे क्रिकेट, वॉलीबॉल, फ़ुटबॉल, बैडमिंटन, कैरम जैसे बहुत सरे खेलों को स्कूलों में खेलवाया जाने लगा।

जब स्कूलों में नियमित रूप से खेल के लिए प्रोत्साहित किया जाने लगा। और बच्चों ने निरंतर खेलना शुरू किया तो उनकी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्षमताओं में तेज़ी से विकास होने लगा। वैसे विद्यार्थी जो खेल में रूचि नहीं रखते थे बुझे बुझे रहते थे। जब उनको खेल के लिए प्रोत्साहित किया गया और उन्हों ने खेलना शुरू किया तो उनमें भी चुस्ती फुर्ती आगई। और पढ़ने में भी तेज़ हो गए।

मैं ने भी अपने स्कूल में इसका प्रयोग पढ़ाई में कमज़ोर बच्चों पर किया। तो आश्चर्यजनक रूप से उन बच्चों में बदलाव आया। मैं ने कक्षा में भी इसका प्रयोग किया। घंटी खेल से ही शुरू किया। मतलब ये कि पहले पाँच मिनट बच्चों को कोई खेल खेलवाया। इसका बहुत ही फ़ायदा नज़र आया।

पहले बच्चे यदि 60% ग्रहण कर पाते थे तो पहले पाँच मिनट कोई खेल खेला देने के बाद 80% से ज़्यादा ग्रहण करने लगे। तब से मैं ने खेल की घंटी के अलावा ये सुनिश्चित किया, कि प्रत्येक शिक्षक अपना विषय शुरू करने से पहले पाँच मिनट बच्चों से कोई न कोई खेल खेलवाएं।

शिक्षा में खेल का महत्व

खेल का सामाजिक तथा राष्ट्रीय महत्व

खेल मनोरंजन का एक साधन भी है। आज कल खेल मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक तथा राष्ट्रीय महत्व भी रखता है। इस से क्षात्रों में अनुशासन पैदा होती है, खेल में नियमों का पालन कर एक साथ मिलकर खेलना पड़ता है। जिस से आपसी सहयोग और मेल जोल बढ़ता है।

यदि किसी दो क्षात्रों में मनमोटाव है तो खेल में भाग लेने से मनमोटाव समाप्त हो जाता है। खेल जीविकार्जन का भी एक बेहतरीन साधन है। पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भाग लेने वाले बच्चे अपना कैरियर खेल में भी अच्छा कर सकते हैं।

आज खेल में ऊँचा स्थान प्राप्त करने वाले व्यक्ति का बड़ा महत्व है। उनको किसी ऊँचे स्थान पर पदस्थापित कर दिया जाता है। उन्हें साड़ी सुविधाएँ दी जाती हैं। अच्छा खेलने वाला व्यक्ति राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय लैवल पर खेलता है। अपना, अपने गाँव , अपने समाज और अपने देश का नाम रौशन करता है।

ऐसा बहुत सा उदाहरण हमारे सामने है। क्रिकेट की दुनिया में बहुत से खिलाड़ियों ने अपने खेल का अच्छा प्रदर्शन कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। कपिलदेव, मो० अज़हरुद्दीन, सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली जैसे बहुत से खिलाड़ियों ने न केवल अपना बल्कि अपने देश का नाम पूरी दुनियाँ में जौशन किया है।

केवल क्रिकेट ही नहीं बहुत से खेलों में भारत के सपूतों ने अपना और अपने देश का नाम पूरी दुनियां में रौशन किया है। इन लोगों ने शिक्षा में खेल का महत्व को समझा  और आज खेल जगत में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवा लिया।

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